अबला और सबल ,के बीच बढ़ चली स्त्री चाँद तक ,मौन तोड़ कर …अपने सपने ख़ुद बना रही है , बुन रही है ख़ुद ही … चूल्हा चौकी से बाहर एक संसार ,वो सफ़ल हो रही है हर कदम पर ,पुरुष का पौरुष भी उन से हैं ,उस वृक्ष का सृजन वही हैं ,उसे नहीं चाहिए , पत्थरों में लोग उसे पूजें पूजा पाषाण खण्डों की मोहताज़ नहीं ,पूजा फूल ,फल , रौली की मोहताज़ भी नहीं ,प्रकृति ने जिसे बनाया है वो नायाब है , अद्वितीय है , वो पूजनीय है ,स्त्री पुरुष पूरक हैं एक दूजे के ,श्रेष्ठ बनने के चक्कर में हम भूल गए ,खुद के पूरक होने को , सभ्यताएँ बीत गई बरसों की ,हम कब बदलेंगे ?? नहीं जानता …? माणिक्य बहुगुना

विवाह 

प्रणय सूत्र में पिरो लेंगे एक दिन हम दिनों ..

गूँथ लेंगे खुद में तुम को ,

तुम मेरी ओढनी बन कर मुझ में लिपट जाओगे ,

सदा के लिए ,

मैं तुम में मिल कर एक हो जाऊंगा ..

उस पर्वत और नदी की तरह …

पक्षी और गगन की तरह …

बस एक दूसरे के पूरक ..
माणिक्य 

आज भी दिखता ऐसा भारत 

आज भी ,

         बारिस के लिए पपिहा बनते हैं लोग ,

और बुझ जाती है कइयों के चूल्हे की आग ,

और फिर निकल पड़ते हैं आग माँगने ,

रसोई, चूल्हा माँगने

सूरज को बुलाने का यत्न करते हैं ,

छत से टपकता पानी एक सुर छेड़ देता है ,

लोटा , गिलास , कटोरी ,थाली पर ,

मेढकों की जमात का अंदर आना

कुत्ते ,बिल्ली का अंदर आना , बाल झड़ना ,

कई दिन हुए बिजली का ना अता ना पता ,

शायद किसी साहब के कमरों में तन गर्म कर रही होगी ,

हीटर बन कर ,

नमक गल जाता है ,

चूल्हा रोने लगता है ,

हथचक्की में चुहिया ब्याही ,

मूसलाधार बारिस ,

जानवर भूखे ,

बच्चे अकुलाते ,

आज भी दिखता ऐसा भारत ,
माणिक्य बहुगुना/पंकज / चंद्र प्रकाश

।। महाभारत ।। स्त्रीषु गोषु न शस्त्राणि पातयेद् ब्राह्मणेषु च । यस्य चान्नानि भुञ्जीत यश्र्च स्याच्छरणागतः ।।38.13।। Weapons should not be used against women , cows and Brahmanas as also against persons whose offered food has been eaten eaten or shelter resorted . स्त्री , गौ , ब्राह्मण , अन्नदाता और शरणागत के ऊपर शस्त्र प्रहार नहीं करना चाहिए ।

      ।। महाभारत ।।

स्त्रीषु गोषु न शस्त्राणि पातयेद्

 ब्राह्मणेषु च ।

यस्य चान्नानि भुञ्जीत यश्र्च स्याच्छरणागतः ।।38.13।।

Weapons should not be used against women , cows and Brahmanas as also against persons whose offered food has been eaten eaten or shelter resorted .

 स्त्री , गौ , ब्राह्मण , अन्नदाता और शरणागत के ऊपर शस्त्र प्रहार नहीं करना चाहिए ।